logo

विकृतचित्त न होते हुए भी कार्यवाहियां न समझ सकने वाले अभियुक्त के मामले में जांच/विचारण जारी रखने तथा दोषसिद्धि पर उच्च न्यायालय को अग्रेषित करने की प्रक्रिया।
जांच/विचारण के दौरान साक्ष्य से दोषी प्रतीत होने वाले अभियुक्त से भिन्न व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही करने, उसे गिरफ्तार/समन करने तथा नए सिरे से विचारण करने की न्यायालय की शक्ति (CrPC धारा 319 समतुल्य)।
पीड़ित/विनिर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा कतिपय अपराधों को न्यायालय की इजाजत से या बिना इजाजत के समझौता (compound) करने की व्यवस्था तथा समझौते का दोषमुक्ति-तुल्य प्रभाव।
लोक अभियोजक द्वारा न्यायालय की सम्मति से अभियोजन से अभिवापन लेने, केंद्रीय सरकार से संबंधित अपराधों में विशेष अनुज्ञा-अपेक्षा तथा पीड़ित को सुने जाने के अनिवार्य अवसर का उपबंध।
मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत होने पर कि मामला किसी अन्य मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है, कार्यवाही रोककर उसे समुचित प्राधिकारी को अग्रेषित करने की प्रक्रिया।
मजिस्ट्रेट को विचारण के दौरान मामला सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय प्रतीत होने पर उसे सुपुर्द करने तथा अध्याय 19 के उपबंध लागू होने का प्रावधान।
सिक्के/स्टाम्प-विधि/संपत्ति संबंधी अपराधों में तीन वर्ष या अधिक की पूर्व दोषसिद्धि रखने वाले व्यक्ति के पुनः अभियुक्त होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सेशन न्यायालय को भेजने की विशेष प्रक्रिया।
अपने अधिकार से अधिक कठोर दंडादेश आवश्यक प्रतीत होने पर मजिस्ट्रेट द्वारा मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेजने तथा उसकी आगे की शक्तियों की प्रक्रिया।
न्यायिक अधिकारी के परिवर्तन पर उत्तरवर्ती न्यायाधीश/मजिस्ट्रेट द्वारा पूर्ववर्ती के अभिलिखित साक्ष्य पर कार्रवाई करने तथा आवश्यक होने पर साक्षियों को पुनः समन करने की शक्ति।
न्यायालय के सामान्यतः खुला होने के नियम, तथा बलात्संग/लैंगिक अपराधों के विचारण को बंद कमरे में संचालित करने, महिला न्यायाधीश की वरीयता तथा प्रकाशन-प्रतिबंध का महत्वपूर्ण संरक्षोपाय। यह धारा अध्याय 26 'जांचों और विचारणों के संबंध में साधारण उपबंध' को पूर्ण करती है।