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आरोप पत्र प्रारूपण (प्रपत्र–'क')

यह उपकरण "बिहार सरकारी सेवकों के विरुद्ध आरोप पत्र का गठन विनियमावली, 2017" के परिशिष्ट-1 (प्रपत्र–'क') के अनुसार चार भागों में आरोप पत्र तैयार करता है — प्रथम भाग (सरकारी सेवक की व्यक्तिगत सूचना), द्वितीय भाग (आरोप का सार), तृतीय भाग (आरोप का अभिकथन) एवं चतुर्थ भाग (दस्तावेजों एवं साक्षियों की सूची)। आप तथ्य दीजिए, AI उन्हें औपचारिक भाषा में आरोप के सार एवं अभिकथन के रूप में लिख देगा।

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कार्यालय एवं कार्यवाही का विवरण

प्रथम भाग — आरोपित सरकारी सेवक की व्यक्तिगत सूचना

केवल सेवानिवृत्त/शीघ्र सेवानिवृत्त होने वाले सेवक के मामले में भरें।

आरोप (द्वितीय एवं तृतीय भाग हेतु)

हर आरोप के लिए अलग ब्लॉक भरें — या तो तथ्य टाइप करें, या उस आरोप से संबंधित दस्तावेज (आरोप का ड्राफ्ट, जाँच प्रतिवेदन, शिकायत आदि) अपलोड करें; AI उसे पढ़कर द्वितीय एवं तृतीय भाग स्वयं भर देगा। तिथि, राशि, कांड/अभिलेख संख्या जितनी सटीक होगी, आरोप पत्र उतना ही सुदृढ़ बनेगा। AI कोई नया तथ्य नहीं जोड़ेगा।

आरोप संख्या–1

अपलोड करने पर AI इसे पढ़कर इस आरोप का सार (भाग-2) एवं अभिकथन (भाग-3) तैयार करेगा — तब नीचे तथ्य लिखना वैकल्पिक है।

चतुर्थ भाग — दस्तावेज एवं साक्षी

नियमानुसार साक्षियों का नाम एवं पदनाम देना आवश्यक है। खाली छोड़ने पर AI ऊपर दिए तथ्यों में आए दस्तावेज/व्यक्ति ही सूची में रखेगा।

अनुशासनिक प्राधिकार

यह पूरे मामले का दस्तावेज है। यदि ऊपर कोई आरोप नहीं भरा गया है, तो AI इसी दस्तावेज से आरोप स्वयं पहचानकर बनाएगा। (फॉर्म में कोई त्रुटि आने पर फाइलें दोबारा चुननी होंगी।)

अस्वीकरण (Disclaimer): यह उपकरण केवल आरोप पत्र का ड्राफ्ट तैयार करने में सहायता हेतु है; यह कोई विधिक परामर्श नहीं है और इसके द्वारा तैयार आरोप पत्र स्वतः विधिमान्य नहीं है। नियमानुसार आरोप पत्र तभी विधिसम्मत माना जाता है जब वह विहित प्रपत्र में हो तथा सक्षम अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा जाँचोपरांत अनुमोदित, हस्ताक्षरित एवं मुहरांकित हो। AI द्वारा लिखे गए आरोप के सार, अभिकथन, उद्धृत नियम/परिपत्र, तिथियाँ, राशि तथा दस्तावेज/साक्षी सूची में त्रुटि संभव है — निर्गत करने से पहले इनका मिलान मूल अभिलेखों एवं प्रचलित नियमावली/परिपत्रों से अवश्य करें। दिए गए तथ्यों एवं अपलोड किए गए दस्तावेजों की सत्यता तथा अंतिम आरोप पत्र की पूर्ण जिम्मेदारी उपयोगकर्ता/अनुशासनिक प्राधिकार की होगी। The Legal Lab इसके उपयोग से उत्पन्न किसी भी परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं है।

The Legal Lab is not a legal advice service. This tool only assists in drafting an Aarop Patra (charge sheet) for departmental proceedings. The draft is AI-generated and may contain errors; it has no legal validity until it is verified, approved, signed and sealed by the competent Disciplinary Authority. Users should verify all facts, figures, rules and circulars cited against the original records and consult a qualified legal professional or the appropriate authority before taking any action.