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विचारण के दौरान अन्वेषण-कुर्क संपत्ति की अभिरक्षा, 14-दिन में कथन तैयार करने, मोबाइल फोटोग्राफ/वीडियोग्राफ लेने (न्यायालय में संपत्ति पेश करने के विकल्प के रूप में साक्ष्य) तथा 30-दिन में व्ययन-आदेश की महत्वपूर्ण नई तकनीक-सक्षम प्रक्रिया।
विचारण की समाप्ति पर संपत्ति के विनाश/समपहरण/परिदान का आदेश, बंधपत्र-शर्त पर परिदान, सेशन न्यायालय द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देशन तथा अपील-अवधि तक निष्पादन-प्रतिबंध।
चोरी की संपत्ति को निर्दोष भाव से खरीदने वाले क्रेता को दोषसिद्ध व्यक्ति से बरामद धन में से उसकी कीमत तक की राशि लौटाने का न्यायसंगत उपबंध।
संपत्ति-व्ययन संबंधी धारा 498/499 के आदेशों के विरुद्ध अपील का अधिकार तथा अपीलीय न्यायालय की आदेश स्थगित/संशोधित/अपास्त करने की शक्ति।
मानहानि/अश्लील सामग्री तथा मिलावटी खाद्य/पेय/औषध की दोषसिद्धियों में उन वस्तुओं की समस्त प्रतियों/सामग्री के विनाश का आदेश देने की न्यायालय की शक्ति।
दांडिक बल/अपराधन से बेकब्जा किए गए व्यक्ति को स्थावर संपत्ति का कब्जा पुनर्स्थापित करने की न्यायालय की शक्ति, एक मास की समय-सीमा तथा सिविल अधिकारों का परिरक्षण।
पुलिस द्वारा कुर्क की गई किंतु न्यायालय के समक्ष पेश न की गई संपत्ति के व्ययन/परिदान की मजिस्ट्रेट-प्रक्रिया, अज्ञात हकदार की दशा में छह मास की दावा-उद्घोषणा सहित।
छह मास में कोई दावेदार न आने तथा वैध अर्जन प्रदर्शित न होने पर संपत्ति के राज्य सरकार के व्ययाधीन होने के आदेश तथा उसके विरुद्ध अपील का उपबंध।
अज्ञात/अनुपस्थित हकदार, शीघ्र क्षय-योग्य या दस हजार रुपए से कम मूल्य की संपत्ति को मजिस्ट्रेट द्वारा किसी भी समय विक्रय कराने की शक्ति। यह धारा अध्याय 36 को पूर्ण करती है।