logo

विचारण की समाप्ति पर 45 दिन के भीतर खुले न्यायालय में निर्णय उद्घोषित करने की तीन रीतियां, इलेक्ट्रॉनिक हाजिरी, पोर्टल-अपलोड की व्यवस्था तथा अनुपस्थिति में भी निर्णय की विधिमान्यता।
निर्णय की भाषा, विषय-वस्तु, वैकल्पिक दोषसिद्धि, मृत्युदंड/आजीवन कारावास के विशेष कारण, न्यून दंडादेश के कारण-अभिलेखन तथा मृत्युदंड की विनिर्दिष्ट भाषा का उपबंध।
तीन वर्ष या अधिक की पूर्व दोषसिद्धि वाले व्यक्ति की पुनः दोषसिद्धि पर पांच वर्ष तक निवास-स्थान सूचित करते रहने का आदेश देने की न्यायालय की शक्ति।
जुर्माने की राशि को अभियोजन-व्यय, पीड़ित-प्रतिकर, मृत्यु-दुर्घटना में आश्रितों के प्रतिकर तथा सद्भावी क्रेता की क्षतिपूर्ति में लगाने तथा जुर्माना-रहित दंडादेश में भी प्रतिकर देने की शक्ति (CrPC धारा 357 समतुल्य)।
पीड़ित/आश्रितों के पुनर्वास हेतु राज्य द्वारा प्रतिकर स्कीम, विधिक सेवा प्राधिकरणों की भूमिका, अज्ञात-अपराधी मामलों में भी प्रतिकर तथा तत्काल प्रथम-सहायता की महत्वपूर्ण नई पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था।
बलात्संग/लैंगिक अपराधों/POCSO के पीड़ितों को सभी अस्पतालों द्वारा तत्काल नि:शुल्क प्रथम-सहायता/चिकित्सीय उपचार देने तथा पुलिस को सूचित करने का अनिवार्य कर्तव्य।
साक्षियों के संरक्षण को सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा साक्षी संरक्षण स्कीम तैयार करने का उपबंध।
निराधार रूप से किसी की गिरफ्तारी कराने वाले व्यक्ति से गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को समय-हानि व व्यय के लिए मजिस्ट्रेट द्वारा प्रतिकर दिलाने की शक्ति।