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दोहरे संकट (double jeopardy) के सिद्धांत को प्रतिष्ठापित करने वाला महत्वपूर्ण उपबंध - एक बार दोषसिद्ध/दोषमुक्त व्यक्ति के पुनः विचारण पर रोक तथा उसके अपवाद।
लोक अभियोजक/सहायक लोक अभियोजक की बिना लिखित प्राधिकार हाजिर होने की शक्ति तथा प्राइवेट व्यक्ति द्वारा अनुदेशित अधिवक्ता के लोक अभियोजक के निदेशाधीन कार्य करने का उपबंध।
मजिस्ट्रेट की इजाजत से इंस्पेक्टर से नीचे के पुलिस अधिकारी से भिन्न व्यक्ति द्वारा अभियोजन संचालन तथा अन्वेषण में भाग लेने वाले पुलिस अधिकारी पर रोक।
किसी दांडिक न्यायालय के समक्ष अभियुक्त या कार्यवाही का सामना कर रहे व्यक्ति के अपनी पसंद के अधिवक्ता द्वारा प्रतिरक्षा कराने का मूल अधिकार।
साधनहीन अभियुक्त को राज्य के व्यय पर निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने का विधिक सहायता उपबंध तथा उच्च न्यायालय की नियम बनाने की शक्ति।
निगम या रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी के अभियुक्त होने की दशा में उसके प्रतिनिधि की नियुक्ति, उसकी उपस्थिति के प्रभाव तथा प्रतिनिधित्व के प्रश्न के अवधारण की प्रक्रिया।
सहअपराधी को पूर्ण एवं सत्य प्रकटन की शर्त पर क्षमादान की निविदा करने, उसे साक्षी के रूप में परीक्षित करने तथा विचारण की समाप्ति तक अभिरक्षा में रखने का उपबंध (approver)।
मामले की सुपुर्दगी के बाद किंतु निर्णय से पूर्व, विचारण करने वाले न्यायालय की स्वयं क्षमादान की निविदा करने की शक्ति।
क्षमादान की शर्तों का जानबूझकर पालन न करने वाले व्यक्ति (approver) पर मूल अपराध व मिथ्या साक्ष्य दोनों के लिए पृथक् विचारण चलाने, तथा शर्तों के पालन के तर्क व साक्ष्य-भार का उपबंध।
जांच/विचारण के दिन-प्रतिदिन चलाए जाने, यौन अपराधों में दो मास की समय-सीमा, तथा स्थगन/मुल्तवी व अभिरक्षा-प्रत्यर्पण पर कड़े निबंधनों व अपवादों का महत्वपूर्ण उपबंध।