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अनधिकृत मजिस्ट्रेट द्वारा सद्भावपूर्वक भूलवश की गई कतिपय प्रक्रियात्मक कार्रवाइयों को केवल अधिकारिता-अभाव के आधार पर अपास्त न किए जाने की सूची।
अनधिकृत मजिस्ट्रेट द्वारा की गई कतिपय गंभीर कार्रवाइयों (कुर्की, प्रतिभूति-मांग, विचारण, अपील-विनिश्चय, पुनरीक्षण आदि) को पूर्णतः शून्य समझने की सूची।
गलत स्थानीय क्षेत्र में हुई कार्यवाही के आधार पर निष्कर्ष/दंडादेश/आदेश अपास्त न किए जाने का सिद्धांत, जब तक वास्तविक न्याय-विफलता न हुई हो।
मजिस्ट्रेट द्वारा स्वीकृति/कथन अभिलिखित करने में धारा 183/316 के प्रक्रियात्मक अननुपालन को, यदि अभियुक्त को क्षति न पहुंची हो, तो साक्ष्य में ग्रहण करने की न्यायालय की शक्ति।
आरोप के लोप/भूल/अनियमितता के प्रभाव, न्याय-विफलता होने पर आरोप विरचित कर पुनः विचारण या नए विचारण के निदेश, तथा विधिमान्य आरोप असंभव होने पर दोषसिद्धि अभिखंडन का सिद्धांत।
परिवाद/समन/वारंट/आदेश/निर्णय में भूल-लोप-अनियमितता के कारण निष्कर्ष/दंडादेश को उलटने का सामान्य सिद्धांत, केवल वास्तविक न्याय-विफलता की दशा में, तथा आपत्ति समय पर उठाई गई या नहीं इसका महत्व।
समन/दोषसिद्धि/कुर्की-रिट में प्ररूप-दोष के आधार पर कुर्की को अविधिपूर्ण या कुर्की करने वाले को अतिचारी न समझे जाने का संरक्षोपाय। यह धारा अध्याय 37 को पूर्ण करती है।