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जुर्माना-वसूली वारंट के न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता के भीतर निष्पादन तथा जिला मजिस्ट्रेट के पृष्ठांकन से बाहरी क्षेत्र में संपत्ति की कुर्की-विक्रय के प्राधिकार का उपबंध।
संहिता के विस्तार-क्षेत्र से बाहर के दांडिक न्यायालय द्वारा जारी जुर्माना-वसूली वारंट को संहिता-क्षेत्र में धारा 461(1)(ख) के वारंट के समान मान्यता देने का उपबंध।
जुर्माना-दंडादेश में व्यतिक्रम-कारावास को किश्तों/समय-सीमा पर भुगतान की शर्त पर स्थगित करने तथा असफल होने पर तुरंत कारावास निष्पादित करने की न्यायालय की शक्ति।
दंडादेश-निष्पादन वारंट मूल दंडादेश देने वाले न्यायाधीश/मजिस्ट्रेट या उसके उत्तरवर्ती अधिकारी द्वारा जारी किए जा सकने का उपबंध।
फरार दोषसिद्ध व्यक्ति पर नए दंडादेश के तुरंत प्रभावी होने या पूर्व दंडादेश की अवशिष्ट अवधि भुगतने के पश्चात् प्रभावी होने का निर्धारण, दंडादेश की कठोरता की तुलना के आधार पर।
पहले से कारावास/आजीवन कारावास भुगत रहे व्यक्ति के पश्चात्वर्ती दंडादेश के क्रमिक या समवर्ती रूप से चलने के नियम (CrPC धारा 427 समतुल्य)।
अन्वेषण/जांच/विचारण के दौरान भुगती गई विचाराधीन निरोध (undertrial detention) की अवधि को दंडादेशित कारावास में घटाने का महत्वपूर्ण संरक्षोपाय (CrPC धारा 428 समतुल्य)।
धारा 466/467 के उपबंध किसी व्यक्ति को दंड के किसी भाग से क्षमा नहीं करते, तथा व्यतिक्रम-कारावास व सारवान् दंडादेशों के क्रम को स्पष्ट करने वाला व्यावृत्ति उपबंध।