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जांच के दौरान अभियुक्त की विकृतचित्तता/बौद्धिक निःशक्तता का पता चलने पर सिविल सर्जन व मनोचिकित्सक की परीक्षा, चिकित्सा बोर्ड में अपील तथा प्रथमदृष्ट्या मामले के आधार पर उन्मोचन/स्थगन की नई विस्तृत प्रक्रिया।
विचारण के दौरान अभियुक्त की विकृतचित्तता प्रकट होने पर न्यायालय द्वारा चिकित्सीय साक्ष्य के आधार पर निष्कर्ष अभिलिखित करने, चिकित्सा बोर्ड में अपील तथा उन्मोचन/स्थगन की प्रक्रिया।
प्रतिरक्षा में असमर्थ पाए गए विकृतचित्त/बौद्धिक निःशक्त व्यक्ति को जमानत पर छोड़ने, अन्यथा उपचार-स्थान में रखने या आवासीय सुविधा में अंतरित करने का उपबंध, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 के अनुपालन सहित।
विकृतचित्त न रह जाने पर स्थगित जांच/विचारण को पुनः प्रारंभ करने तथा अभियुक्त की प्रतिरक्षा-समर्थता के प्रमाणपत्र को साक्ष्य में ग्रहण करने का उपबंध।
पुनः हाजिर हुए अभियुक्त के प्रतिरक्षा-समर्थ पाए जाने पर कार्यवाही जारी रखने तथा असमर्थ बने रहने पर पुनः धारा 367/368/369 की प्रक्रिया अपनाने का उपबंध।
वर्तमान में स्वस्थचित्त अभियुक्त द्वारा कार्य के समय विकृतचित्तता की दशा में किया गया कार्य - विकृतचित्तता की प्रतिरक्षा (BNS धारा 22) से संबंधित मामले को विचारण/सुपुर्दगी के लिए आगे बढ़ाने का उपबंध।