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धारा 447 से भिन्न रूप से उच्च न्यायालय द्वारा किसी अपराध के विचारण में सेशन न्यायालय की प्रक्रिया अनुपालित किए जाने का उपबंध।
सैन्य कार्मिकों के दोहरे-अधिकारिता (सिविल न्यायालय बनाम कोर्ट-मार्शल) मामलों में मजिस्ट्रेट द्वारा उन्हें समादेशक अधिकारी को परिदत्त करने की केंद्रीय-नियम-आधारित प्रक्रिया।
संहिता की द्वितीय अनुसूची में दिए गए प्ररूपों को, आवश्यक विभेदों सहित, विभिन्न प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाए जाने पर्याप्त होने का उपबंध।
अधीनस्थ न्यायालयों में याचिका-लेखकों के लाइसेंसीकरण, आचरण, फीस और दंड संबंधी नियम बनाने की उच्च न्यायालय की शक्ति, राजपत्र-प्रकाशन की अनिवार्यता सहित।
राज्य विधान सभा के संकल्प पर, विनिर्दिष्ट धाराओं में कार्यपालक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देशों को प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट के प्रति निर्देश के रूप में परिवर्तित करने की राज्य सरकार की शक्ति।
न्यायाधीश/मजिस्ट्रेट के स्वयं पक्षकार या वैयक्तिक रूप से हितबद्ध होने की दशा में विचारण/स्वयं के निर्णय पर अपील-सुनवाई का निषेध, तथा पदीय संबद्धता को अपवाद रखने वाला स्पष्टीकरण (natural justice - nemo judex in causa sua सिद्धांत)।