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सेशन न्यायालय के समक्ष प्रत्येक विचारण में अभियोजन का संचालन अनिवार्यतः लोक अभियोजक द्वारा किए जाने का मूल उपबंध।
मामला सुपुर्द होने पर अभियोजक द्वारा आरोप का वर्णन करते हुए तथा साक्ष्य की योजना बताते हुए अपना मामला खोलने का उपबंध।
मामले की सुपुर्दगी के साठ दिन के भीतर उन्मोचन हेतु आवेदन तथा पर्याप्त आधार न होने पर न्यायाधीश द्वारा अभियुक्त को उन्मोचित करने की शक्ति।
अपराध सेशन-विचारणीय न होने पर मजिस्ट्रेट को अंतरित करने तथा केवल सेशन-विचारणीय होने पर साठ दिन के भीतर लिखित आरोप विरचित करने की प्रक्रिया।
अभियुक्त द्वारा दोषी होने का अभिवचन करने पर न्यायाधीश द्वारा उसे अभिलिखित कर विवेकानुसार दोषसिद्ध करने की शक्ति।
दोषी न होने पर या दोषसिद्धि न होने पर साक्षियों की परीक्षा हेतु तारीख नियत करने तथा साक्षी-हाजिरी बाध्य कराने की प्रक्रिया।
नियत तारीख पर अभियोजन साक्ष्य लेने, लोक सेवक के साक्ष्य को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से लेने तथा प्रतिपरीक्षा स्थगित करने की न्यायाधीश की शक्ति।