बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित प्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि मां दुर्गा अपने परम भक्त रहषु भगत को दर्शन देने के लिए असम के कामाख्या धाम से थावे पहुंची थीं। मां के इसी स्वरूप को सिंहासिनी भवानी, थावे भवानी और रहषु भवानी के नाम से जाना जाता है। शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
लोककथा के अनुसार, प्राचीन काल में हथुआ क्षेत्र पर राजा मनन सिंह का शासन था। वे स्वयं को मां दुर्गा का सबसे बड़ा भक्त मानते थे। इसी दौरान उनके राज्य में भीषण अकाल पड़ा। लोगों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया। उसी समय थावे प्रखंड के भवानीपुर गांव में रहषु भगत नामक मां का अनन्य भक्त रहता था।
रहषु भगत की भक्ति से प्रकट होता था अनाज
किंवदंती है कि रहषु भगत घास काटते थे और मां की कृपा से उनके पास घास से अनाज उत्पन्न होने लगता था। लोकमान्यता के अनुसार, घास काटने के दौरान सात बाघ और सात गेहूं के दाने प्रकट होते थे, जिनसे लोगों के लिए अनाज उपलब्ध होता था। इस चमत्कार की चर्चा धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में फैल गई और इसकी खबर राजा मनन सिंह तक पहुंची।
राजा को रहषु भगत की शक्ति पर विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने रहषु को ढोंगी समझा और मां दुर्गा को साक्षात बुलाने की चुनौती दे डाली। रहषु भगत ने राजा को चेतावनी दी कि मां के आगमन को सहन करना आसान नहीं होगा और इससे राजपाट पर संकट आ सकता है। लेकिन राजा अपनी जिद पर अड़े रहे।
कामाख्या से थावे पहुंचीं मां भवानी
लोककथा के अनुसार, रहषु भगत की पुकार पर मां दुर्गा कामाख्या धाम से चलकर कोलकाता, पटना और आमी होते हुए थावे पहुंचीं। उनके आगमन के समय भयंकर आंधी-तूफान उठा, बिजली कड़कने लगी और मूसलाधार बारिश होने लगी। राजा का महल भी इस प्राकृतिक प्रकोप से ढहने लगा। रहषु भगत ने राजा से बार-बार मां की महिमा स्वीकार करने की विनती की, लेकिन राजा ने उनकी बात नहीं मानी।
मान्यता है कि मां भवानी के थावे पहुंचते ही राजा का राजपाट नष्ट हो गया। मां ने अपने भक्त रहषु भगत को दर्शन दिए। इस दौरान रहषु भगत का मस्तक फटने और उसमें से मां के दाहिने हाथ का कंगन दिखाई देने की कथा भी प्रचलित है। राजा मनन सिंह ने मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन किया और अंततः उनका निधन हो गया।
थावे मंदिर बना आस्था का प्रमुख केंद्र
लोकमान्यता के अनुसार, इसके बाद मां सिंहासिनी भवानी के नाम से प्रसिद्ध हुईं और थावे में उनके मंदिर की स्थापना हुई। समय के साथ यह मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। हालांकि, इस कथा के विभिन्न रूप स्थानीय परंपराओं में प्रचलित हैं और इनका ऐतिहासिक विवरण अलग-अलग मिल सकता है।
आज थावे दुर्गा मंदिर में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और देश के अन्य हिस्सों से भी श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना और मेले का आयोजन होता है। इसके अतिरिक्त सोमवार और शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन करने आते हैं। सावन के महीने में भी मंदिर में विशेष धार्मिक गतिविधियां होती हैं।
थावे वाली मां के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और रहषु भगत की भक्ति की यह लोककथा आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती है। मां भवानी का यह धाम गोपालगंज जिले की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


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