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अध्याय 38 के प्रयोजन हेतु "परिसीमन की अवधि" पद की परिभाषा।
जुर्माना-मात्र (6 मास), एक वर्ष तक कारावास (1 वर्ष) और एक-से-तीन वर्ष तक कारावास (3 वर्ष) के अपराधों के लिए परिसीमन-अवधि तथा संयुक्त विचारण में सर्वाधिक कठोर अपराध के आधार पर अवधि निर्धारण।
परिसीमन की अवधि के प्रारंभ-बिंदु को अपराध की तारीख, या अपराध/अपराधी की पहचान ज्ञात होने की तारीख के आधार पर निर्धारित करने का उपबंध।
सद्भावपूर्वक समांतर अभियोजन, व्यादेश/आदेश द्वारा रोक, सरकारी सम्मति की प्रतीक्षा तथा अपराधी की अनुपस्थिति/फरारी के समय को परिसीमन-अवधि की संगणना से अपवर्जित करने के चार परिदृश्य।
परिसीमन-अवधि की समाप्ति न्यायालय-बंदी के दिन होने पर न्यायालय के पुनः खुलने के दिन संज्ञान लिए जा सकने की व्यावहारिक व्यवस्था।
सतत (जारी रहने वाले) अपराधों में हर क्षण नई परिसीमन-अवधि प्रारंभ होने का सिद्धांत।
न्याय के हित में या विलंब के समुचित स्पष्टीकरण पर परिसीमन-अवधि बीत जाने के बाद भी संज्ञान लेने की न्यायालय की उद्धारक (saving) विवेकाधीन शक्ति। यह धारा अध्याय 38 को पूर्ण करती है।