logo

न्याय के उद्देश्यों के लिए मामला/अपील एक उच्च न्यायालय से दूसरे को, या एक न्यायालय से समान/वरिष्ठ अधिकारिता के दूसरे न्यायालय को, अंतरित करने की उच्चतम न्यायालय की शक्ति, तुच्छ आवेदन पर प्रतिकर सहित।
निष्पक्ष विचारण न हो सकने, असाधारण विधि-प्रश्न या न्याय के उद्देश्यों के लिए मामला/अपील अंतरित करने या स्वयं विचारण करने की उच्च न्यायालय की विस्तृत शक्ति, 30-दिन की निपटान-समय-सीमा तथा तुच्छ आवेदन पर प्रतिकर सहित।
अपने सत्र-खंड के भीतर एक दांडिक न्यायालय से दूसरे को मामला अंतरित करने की सेशन न्यायाधीश की समांतर शक्ति, दस हजार रुपए तक की सीमित प्रतिकर-शक्ति सहित।
सेशन न्यायाधीश की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/अपर सेशन न्यायाधीश को सुपुर्द मामले/अपील को वापस लेने या पुनः बुलाने तथा स्वयं व्ययित करने या पुनर्सुपुर्दगी की शक्ति।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अधीनस्थ मजिस्ट्रेट से मामला वापस लेने या निर्दिष्ट करने, तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट की सुपुर्द मामला पुनः बुलाकर स्वयं जांच/विचारण करने की शक्ति।
जिला मजिस्ट्रेट/उपखंड मजिस्ट्रेट की अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को कार्यवाही सुपुर्द करने या वापस लेकर स्वयं या अन्य मजिस्ट्रेट को व्ययन के लिए निर्दिष्ट करने की शक्ति।
धारा 448-451 के अधीन मामला-अंतरण/वापसी के आदेश देने वाले सेशन न्यायाधीश/मजिस्ट्रेट द्वारा अपने कारण अभिलिखित करने की अनिवार्यता। यह धारा अध्याय 33 को पूर्ण करती है।