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प्रत्येक भिन्न अपराध के लिए पृथक् आरोप व पृथक् विचारण के मूल नियम तथा अभियुक्त की सम्मति से संयुक्त विचारण की छूट, एक उदाहरण सहित।
बारह मास के भीतर एक ही प्रकार के पांच तक अपराधों का एक साथ आरोप लगाकर एक ही विचारण में विचारण किए जा सकने का उपबंध।
एक ही संव्यवहार में किए गए बहु-अपराधों, लेखा मिथ्याकरण तथा संयुक्त कृत्यों से भिन्न अपराध बनने की स्थितियों में एक साथ विचारण का उपबंध।
अपराध की प्रकृति संदिग्ध होने पर विकल्पतः आरोप लगाने तथा साक्ष्य से भिन्न अपराध प्रदर्शित होने पर भी दोषसिद्धि किए जा सकने का उपबंध, तीन उदाहरणों सहित।
आरोपित अपराध के भीतर अंतर्विष्ट लघुतर अपराध या उसे करने के प्रयत्न के लिए बिना अलग आरोप के भी दोषसिद्धि किए जा सकने का उपबंध।
सहअभियुक्तों, दुष्प्रेरकों, चोरी-सह-चुराई संपत्ति के प्राप्तकर्ताओं आदि श्रेणियों के व्यक्तियों पर संयुक्त आरोप व संयुक्त विचारण की सूची।
बहु-शीर्षक आरोप में एक पर दोषसिद्धि होने पर शेष आरोप वापस लिए जाने तथा उसे दोषमुक्ति के तुल्य समझे जाने का उपबंध।