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किसी अधिनियम/अध्यादेश/विनियम की विधिमान्यता संदेहास्पद होने पर या विधि-प्रश्न पर न्यायालय द्वारा उच्च न्यायालय को मामला निर्दिष्ट करने की प्रक्रिया।
निर्दिष्ट प्रश्न पर उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप निर्देशक न्यायालय द्वारा मामले का व्ययन तथा निर्देश-व्यय के भुगतान का निदेश।
उच्च न्यायालय/सेशन न्यायाधीश की अवर न्यायालयों के निष्कर्ष/दंडादेश/आदेश की शुद्धता जांचने के लिए अभिलेख मंगवाने की पुनरीक्षण शक्ति, अंतर्वर्ती आदेशों पर अपवाद तथा दोहरे आवेदन पर रोक।
पुनरीक्षण अभिलेख की जांच के आधार पर खारिज परिवाद या उन्मोचित अभियुक्त के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से आगे जांच का आदेश देने की शक्ति, अवसर की गारंटी सहित।
सेशन न्यायाधीश को स्वयं मंगवाए अभिलेख पर उच्च न्यायालय-तुल्य पुनरीक्षण शक्तियां प्रदान करने तथा सेशन न्यायाधीश के विनिश्चय की अंतिमता का उपबंध।