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राज्य सरकार के निदेश पर रजिस्ट्रार/उप-रजिस्ट्रार को धारा 384-385 के प्रयोजन के लिए सिविल न्यायालय समझे जाने का उपबंध।
धारा 384/385 के अधीन दंडादेशित अपराधी को उसके द्वारा न्यायालय के आदेश का पालन करने या समाधानप्रद क्षमा-याचना करने पर उन्मुक्त करने या दंड अध्यर्पित करने की विवेकाधीन शक्ति।
बिना युक्तियुक्त कारण उत्तर देने या दस्तावेज/वस्तु पेश करने से इंकार करने वाले साक्षी को सात दिन तक अभिरक्षा में सुपुर्द करने या कारावासित करने की न्यायालय की शक्ति।
बिना न्यायसंगत कारण समन का पालन न करने वाले साक्षी पर न्यायालय की पांच सौ रुपए तक के जुर्माने की संक्षिप्त दंड-प्रक्रिया।
धारा 383/384/388/389 के अधीन संक्षिप्त दंडादेशों के विरुद्ध सामान्यतः अपीलनीय न्यायालय में, तथा लघुवाद न्यायालय/रजिस्ट्रार की दशा में सेशन न्यायालय में, अपील का उपबंध।
सीमित संक्षिप्त-शक्ति वाली धाराओं के अपवाद के सिवाय, न्यायाधीश/मजिस्ट्रेट द्वारा स्वयं अपने समक्ष किए गए धारा 215 के अपराधों का स्वयं विचारण न करने का निष्पक्षता-संरक्षोपाय। यह धारा अध्याय 28 को पूर्ण करती है।