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न्यायालय की कार्यवाहियों में या उनसे संबंधित न्याय-प्रशासन के विरुद्ध अपराधों के लिए परिवाद करने, अभियुक्त को मजिस्ट्रेट के पास भेजने की प्रक्रिया तथा 'न्यायालय' शब्द की धारा 215 के अनुरूप परिभाषा।
धारा 379 के अधीन परिवाद करने से इंकार या परिवाद किए जाने पर उच्चतर न्यायालय में अपील का उपबंध, तथा आदेश की अंतिमता व पुनरीक्षण-वर्जन।
धारा 379/380 के आवेदनों से निपटने वाले न्यायालय की न्यायसंगत व्यय-आदेश देने की शक्ति।
धारा 379/380 के परिवाद पर मजिस्ट्रेट द्वारा मामले को पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित मामले की भांति निपटाने तथा लंबित अपील/पुनरीक्षण पर सुनवाई स्थगित करने की प्रक्रिया।
निर्णय सुनाते समय साक्षी के मिथ्या साक्ष्य देने की राय बनने पर सेशन न्यायालय/प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट की संक्षिप्त विचारण द्वारा सीधे दंडादेश देने की शक्ति व सीमाएं।
न्यायालय की दृष्टि/उपस्थिति में किए गए कतिपय न्याय-प्रशासन विरुद्ध अपराधों के लिए न्यायालय की तत्काल जुर्माना/कारावास दंडादेश देने की सारांश शक्ति।
जहां धारा 384 की सीमित सारांश दंड-शक्ति अपर्याप्त हो वहां न्यायालय द्वारा तथ्य अभिलिखित कर मामला सक्षम मजिस्ट्रेट के पास भेजने की प्रक्रिया।