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आरोप में अपराध, दंडनीय विधि की धारा तथा पूर्व दोषसिद्धि का कथन किए जाने की अनिवार्यता से संबंधित मूल उपबंध।
आरोप में अपराध के समय, स्थान और व्यक्ति की विशिष्टियां तथा न्यासभंग जैसे मामलों में सकल रकम विनिर्दिष्ट करने की छूट का उपबंध।
जब अपराध के समय-स्थान की सूचना पर्याप्त न हो तब आरोप में अपराध करने की रीति भी कथित करने की अनिवार्यता, छह उदाहरणों सहित।
आरोप में अपराध वर्णन हेतु प्रयुक्त शब्दों को संबंधित दंडनीय विधि द्वारा दिए गए अर्थ में ही लिए जाने का व्याख्या-नियम।
आरोप में त्रुटि या लोप केवल तब तात्त्विक समझे जाने का सिद्धांत जब अभियुक्त वस्तुतः भ्रमित हुआ हो और न्याय असफल हुआ हो, पांच उदाहरणों सहित।
निर्णय से पूर्व किसी भी समय आरोप में फेरफार करने की न्यायालय की शक्ति तथा उससे प्रतिकूल प्रभाव पड़ने पर नए विचारण/स्थगन की प्रक्रिया।
विचारण के प्रारंभ के पश्चात् आरोप में फेरफार होने पर अभियोजक व अभियुक्त को साक्षी वापस बुलाने या नया साक्षी बुलाने की अनुज्ञा का उपबंध।