105. यह साबित करने का भार कि अभियुक्त का मामला अपवादों के अन्तर्गत आता है

Author: | Date: 2022-12-05 20:32:33

105. यह साबित करने का भार कि अभियुक्त का मामला अपवादों के अन्तर्गत आता है -- जबकि कोई व्यक्ति किसी अपराध का अभियुक्त है, तब उन परिस्थितियों के अस्तित्व को साबित करने का भार, जो उस मामले को भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) के साधारण अपवादों में से किसी के अन्तर्गत या उसी संहिता के किसी अन्य भाग में, या उस अपराध की परिभाषा करने वाली किसी विधि में, अन्तर्विष्ट किसी विशेष अपवाद या परन्तुक के अन्तर्गत कर देती है, उस व्यक्ति पर है और न्यायालय ऐसी परिस्थितियों के अभाव की उपधारणा करेगा।

दृष्टांत

(क) हत्या का अभियुक्त, क अभिकथित करता है कि वह चित्त-विकृति के कारण उस कार्य की प्रकृति नहीं जानता था। सबूत का भार क पर है। (ख) हत्या का अभियुक्त, क, अभिकथित करता है कि वह गंभीर और अचानक प्रकोपन के कारण आत्मनियंत्रण की शक्ति से वंचित हो गया था। सबूत का भार क पर है। (ग) भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) की धारा 325 उपबंध करती है कि जो कोई उस दशा के सिवाय जिसके लिए धारा 335 में उपबंध है, स्वेच्छया घोर उपहति करेगा, वह अमुक दण्डों से दण्डनीय होगा। क पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने का, धारा 325 के अधीन आरोप है। इस मामले को धारा 335 के अधीन लाने वाली परिस्थितियों को साबित करने का भार क पर है।