57. वे तथ्य, जिनकी न्यायिक अवेक्षा न्यायालय को करनी होगी

Author: | Date: 2022-12-05 13:28:02

57. वे तथ्यजिनकी न्यायिक अवेक्षा न्यायालय को करनी होगी -- न्यायालय निम्नलिखित तथ्यों की न्यायिक अवेक्षा करेगा--
(1) भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त समस्त विधियाँ; (2) यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामेण्ट द्वारा पारित या एतद्पश्चात् पारित किए जाने वाले समस्त पब्लिक ऐक्ट तथा वे समस्त स्थानीय और पर्सनल ऐक्ट जिनके बारे में यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामेण्ट ने निर्दिष्ट किया है कि उनकी न्यायिक अवेक्षा की जाए; (3) भारतीय सेना, नौसेना या वायुसेना के लिए युद्ध की नियमावली; (4) यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामेण्ट की, भारत की संविधान सभा की, संसद की तथा किसी प्रान्त या राज्यों में तत्समय प्रवृत्त विधियों के अधीन स्थापित विधान मण्डलों की कार्यवाही का अनुक्रम; (5) ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैण्ड की यूनाइटेड किंगडम के तत्समय प्रभु का राज्यारोहण और राजहस्ताक्षर; (6) वे सब मुद्राएं, जिनकी अंग्रेजी न्यायालय न्यायिक अवेक्षा करते हैं, भारत में के सब न्यायालयों की और केन्द्रीय सरकार या क्राउन रिप्रेजेण्टेटिव के प्राधिकार द्वारा भारत के बाहर स्थापित सब न्यायालयों की मुद्राएँ, नावधिकरण और समुद्रीय अधिकारिता वाले न्यायालयों की और नोटरीज़ पब्लिक की मुद्राएँ और वे सब मुद्राएँ, जिनका कोई व्यक्ति संविधान या यूनाइटेड किंगडम की पार्लियामेण्ट के किसी ऐक्ट या भारत में विधि का बल रखने वाले अधिनियम या विनियम द्वारा उपयोग करने के लिए प्राधिकृत है; (7) किसी राज्य में किसी लोकपद पर तत्समय आरूढ़ व्यक्तियों के कोई पदारोहण, नाम, उपाधियां, कृत्य और हस्ताक्षर, यदि ऐसे पद पर उनकी नियुक्ति का तथ्य किसी शासकीय राजपत्र में अधिसूचित किया गया हो; (8) भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हर राज्य या प्रभु का अस्तित्व, उपाधि और राष्ट्रीय ध्वज; (9) समय के प्रभाग, पृथ्वी के भौगोलिक प्रभाग तथा शासकीय राजपत्र में अधिसूचित लोक उत्सव, उपवास और अवकाश-दिन; (10) भारत सरकार के आधिपत्य के अधीन राज्य-क्षेत्र; (11) भारत सरकार और अन्य किसी राज्य या व्यक्तियों के निकाय के बीच संघर्ष का प्रारंभ, चालू रहना और पर्यवसान; (12) न्यायालय के सदस्यों और ऑफिसरों के तथा उनके उप-पदियों और अधीनस्थ ऑफिसरों और सहायकों के और उसकी आदेशिकाओं के निष्पादन में कार्य करने वाले सब ऑफिसरों के भी, तथा सब अधिवक्ताओं, अटर्नियों, प्रोक्टरों, वकीलों, प्लीडरों और उसके समक्ष उपसंजात होने या कार्य करने के लिए किसी विधि द्वारा प्राधिकृत अन्य व्यक्तियों के नाम; (13) भूमि या समुद्र पर मार्ग का नियम। इन सभी मामलों में, तथा लोक-इतिहास, साहित्य, विज्ञान या कला के सब विषयों में भी न्यायालय समुपयुक्त निर्देश पुस्तकों या दस्तावेजों की सहायता ले सकेगा। यदि न्यायालय से किसी तथ्य की न्यायिक अवेक्षा करने की किसी व्यक्ति द्वारा प्रार्थना की जाती है, तो यदि और जब तक वह व्यक्ति कोई ऐसी पुस्तक या दस्तावेज पेश न कर दे, जिसे ऐसा न्यायालय अपने को ऐसा करने को समर्थ बनाने के लिए आवश्यक समझता है, न्यायालय ऐसा करने से इंकार कर सकेगा।