43. धाराओं 40 से 42 में वर्णित से भिन्न निर्णय आदि कब सुसंगत हैं 

Author: | Date: 2022-12-03 20:56:37

43. धाराओं 40 से 42 में वर्णित से भिन्न निर्णय आदि कब सुसंगत हैं -- धाराएँ 40, 41 और 42 में वर्णित से भिन्न निर्णय, आदेश या डिक्रियाँ विसंगत हैं जब तक कि ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री का अस्तित्व विवाद्यक तथ्य न हो या वह इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अन्तर्गत सुसंगत न हो।

दृष्टांत

(क) क और ख किसी अपमान लेख के लिए जो उनमें से हर एक पर लांछन लगाता है, ग पर पृथक्-पृथक् वाद लाते हैं। हर एक मामले में ग कहता है कि वह बात, जिसका अपमान-लेखीय होना अभिकथित है, सत्य है और परिस्थितियाँ ऐसी हैं कि वह अधिसंभाव्यत: या तो हर एक मामले में सत्य है या किसी में नहीं। ग के विरुद्ध क इस आधार पर कि ग अपना न्यायोचित साबित करने में असफल रहा नुकसानी की डिक्री अभिप्राप्त करता है। यह तथ्य ख और ग के बीच विसंगत है। (ख) क अपनी पत्नी ग के साथ जारकर्म करने के लिए ख का अभियोजन करता है। ख इस बात का प्रत्याख्यान करता है कि ग क की पत्नी है, किन्तु न्यायालय ख को जारकर्म के लिए दोषसिद्ध करता है। तत्पश्चात् क के जीवनकाल में ख के साथ विवाह करने पर द्वि-विवाह के लिए ग अभियोजित की जाती है। ग कहती है कि वह क की पत्नी कभी नहीं थी। ख के विरुद्ध दिया गया निर्णय ग के विरुद्ध विसंगत है। (ग) ख का अभियोजन क इसलिए करता है कि उसने क की गाय चुराई है। ख दोषसिद्ध किया जाता है। तत्पश्चात् क उस गाय के लिए जिसे ख ने दोषसिद्ध होने से पूर्व ग को बेच दिया था, ग पर वाद लाता है। ख के विरुद्ध वह निर्णय क और ग के बीच विसंगत है।
(घ) क ने ख के विरुद्ध भूमि के कब्जे की डिक्री अभिप्राप्त की है। ख का पुत्र ग परिणामस्वरूपक की हत्या करता है।
उस निर्णय का अस्तित्व अपराध का हेतु दर्शित करने के नाते सुसंगत है।
(ङ) क पर चोरी का और चोरी के लिए पूर्व दोषसिद्धि का आरोप है। पूर्व दोषसिद्धि विवाद्यक तथ्य होने के नाते सुसंगत है। (च) ख की हत्या के लिए क विचारित किया जाता है। यह तथ्य कि ख ने क पर अपमान लेख के लिए अभियोजन चलाया था और क दोषसिद्ध और दण्डित किया गया था, धारा 8 के अधीन विवाद्यक तथ्य का हेतु दर्शित करने के नाते सुसंगत है।