दृष्टांत
(क) क और ख किसी अपमान लेख के लिए जो उनमें से हर एक पर लांछन लगाता है, ग पर पृथक्-पृथक् वाद लाते हैं। हर एक मामले में ग कहता है कि वह बात, जिसका अपमान-लेखीय होना अभिकथित है, सत्य है और परिस्थितियाँ ऐसी हैं कि वह अधिसंभाव्यत: या तो हर एक मामले में सत्य है या किसी में नहीं। ग के विरुद्ध क इस आधार पर कि ग अपना न्यायोचित साबित करने में असफल रहा नुकसानी की डिक्री अभिप्राप्त करता है। यह तथ्य ख और ग के बीच विसंगत है। (ख) क अपनी पत्नी ग के साथ जारकर्म करने के लिए ख का अभियोजन करता है। ख इस बात का प्रत्याख्यान करता है कि ग क की पत्नी है, किन्तु न्यायालय ख को जारकर्म के लिए दोषसिद्ध करता है। तत्पश्चात् क के जीवनकाल में ख के साथ विवाह करने पर द्वि-विवाह के लिए ग अभियोजित की जाती है। ग कहती है कि वह क की पत्नी कभी नहीं थी। ख के विरुद्ध दिया गया निर्णय ग के विरुद्ध विसंगत है। (ग) ख का अभियोजन क इसलिए करता है कि उसने क की गाय चुराई है। ख दोषसिद्ध किया जाता है। तत्पश्चात् क उस गाय के लिए जिसे ख ने दोषसिद्ध होने से पूर्व ग को बेच दिया था, ग पर वाद लाता है। ख के विरुद्ध वह निर्णय क और ग के बीच विसंगत है।43. धाराओं 40 से 42 में वर्णित से भिन्न निर्णय आदि कब सुसंगत हैं
Author: | Date: 2022-12-03 20:56:37


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