दृष्टांत
क अपनी भूमि पर अतिचार के लिए ख पर वाद लाता है। ख उस भूमि पर मार्ग के लोक अधिकार का अस्तित्व अभिकथित करता है जिसका क प्रत्याख्यान करता है। क द्वारा ग के विरुद्ध उसी भूमि पर अतिचार के लिए वाद में, जिसमें ग ने उसी मार्गाधिकार का अस्तित्व अभिकथित किया था, प्रतिवादी के पक्ष में डिक्री का अस्तित्व सुसंगत है, किन्तु वह इस बात का निश्चायक सबूत नहीं है कि वह मार्गाधिकार अस्तित्व में है।42. धारा 41 में वर्णित से भिन्न निर्णयों, आदेशों या डिक्रियों की सुसंगति और प्रभाव
Author: | Date: 2022-12-03 20:53:34


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