शॉर्ट सर्किट की चिंगारी ने छीना किसानों का निवाला, 110 बीघा गेहूं की फसल जलकर राख

Author: आलोक कुमार | Date: 2026-04-02 19:34:10

गोपालगंज - भोरे प्रखंड के डीह जैतपुरा गांव के किसानों पर गुरुवार को कुदरत और सिस्टम की ऐसी मार पड़ी कि उनकी साल भर की मेहनत चंद घंटों में धुएं में तब्दील हो गई. डीह जैतपुरा गांव के चंवर में बिजली के शॉर्ट सर्किट से निकली एक छोटी सी चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और 57 किसानों की लगभग 110 बीघा में खड़ी गेहूं की फसल को जलाकर राख कर दिया. पछुआ हवा ने ढाया कहर दोपहर के समय जब गर्मी अपने शबाब पर थी, तभी अचानक खेतों के ऊपर से गुजर रही बिजली की तारों में शॉर्ट सर्किट हुआ. खेत में खड़ी सूखी फसल ने आग को तत्काल पकड़ लिया. रही-सही कसर तेज पछुआ हवा ने पूरी कर दी. आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर-दूर से आसमान में सिर्फ काला धुआं नजर आ रहा था. अपनी आंखों के सामने अपनी गाढ़ी कमाई को जलता देख किसानों में चीख-पुकार मच गई. ग्रामीणों ने साहस का परिचय देते हुए निजी संसाधनों और फायर ब्रिगेड के सहयोग से घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया.

बीडीओ ने लिया जायजा, किसानों को बंधाया ढांढस

घटना की सूचना मिलते ही प्रखंड विकास पदाधिकारी दिनेश कुमार सिंह ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया. उन्होंने जलते हुए खेतों की स्थिति देखी और व्यथित किसानों से बात कर उनका हाल जाना. बीडीओ ने पीड़ित किसानों को ढांढस बंधाते हुए आश्वस्त किया कि प्रशासन इस दुख की घड़ी में उनके साथ है. उन्होंने राजस्व कर्मियों को निर्देश दिया कि वे तत्काल नुकसान का आकलन (सर्वे) करें ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द सरकारी सहायता और उचित मुआवजा दिलाया जा सके.

आंसुओं में डूबी किसानों की मेहनत

हादसे के बाद गांव में मातम पसरा है.इस घटना में प्रभावित होने वाले प्रमुख किसानों में गुलाब भगत, राजू कुशवाहा, सुकीम भगत, श्रीराम यादव, प्रयाग भगत, राधेश्याम यादव, सहदेव यादव, लालबिहारी कुशवाहा, बलिराम यादव, बबन यादव, जयप्रकाश कुशवाहा, अवधेश यादव, उत्तम कुशवाहा, रघुनाथ प्रसाद, परशुराम भगत, जगदीश गोंड, विपिन भगत, लालचन्द कुशवाहा, रामअश्रय, मधूनी भगत, रामअश्रय कुशवाहा, ओमप्रकाश सिंह और जयप्रकाश सिंह समेत कुल 57 किसान शामिल हैं. एक पीड़ित किसान के कहा कि बेटी की शादी और बच्चों की पढ़ाई की सारी उम्मीदें इसी गेहूं की फसल पर टिकी थीं. अब तो पेट पालने का भी संकट खड़ा हो गया है.

अब पूरे गांव की नजरें प्रशासन की रिपोर्ट पर टिकी हैं, ताकि इस आर्थिक आघात से उबरने के लिए उन्हें समय पर मदद मिल सके.