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सभी व्यक्ति साक्ष्य देने में सक्षम हैं, जब तक न्यायालय को न लगे कि कोमल वय, वृद्धावस्था, रोग आदि के कारण वे प्रश्न समझने या युक्तिसंगत उत्तर देने में असमर्थ हैं।
बोलने में असमर्थ साक्षी लेखन/संकेतों द्वारा साक्ष्य दे सकता है (मौखिक साक्ष्य माना जाएगा); यदि मौखिक संसूचन असमर्थ हो तो द्विभाषिए/विशेष प्रबोधक की सहायता ली जाएगी और कथन की वीडियोग्राफी की जाएगी।
सिविल कार्यवाहियों में वाद के पक्षकार और उनके पति/पत्नी सक्षम साक्षी हैं; दाण्डिक कार्यवाहियों में अभियुक्त का पति या पत्नी सक्षम साक्षी है।
न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को अपने न्यायालयीन आचरण या ज्ञात बातों के बारे में विशेष न्यायालयी आदेश के बिना उत्तर देने हेतु विवश नहीं किया जा सकता, परन्तु अन्य बातों की परीक्षा हो सकती है।
विवाहित/भूतपूर्व विवाहित व्यक्ति को विवाह के दौरान जीवनसाथी द्वारा की गई संसूचना प्रकट करने हेतु विवश नहीं किया जाएगा, सिवाय संसूचनाकर्ता की सम्मति या पति-पत्नी के परस्पर वाद/अभियोजन के।
राज्य के कार्यकलापों से संबंधित अप्रकाशित शासकीय अभिलेखों से व्युत्पन्न साक्ष्य केवल संबंधित विभाग के प्रमुख अधिकारी की अनुज्ञा से ही दिया जा सकता है।
कोई लोक अधिकारी शासकीय विश्वास में दी गई संसूचनाएं प्रकट करने हेतु विवश नहीं किया जाएगा, यदि उसे लगे कि प्रकटन से लोक हित की हानि होगी।
मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी या राजस्व अधिकारी को अपराध की जानकारी कब मिली, यह बताने के लिए विवश नहीं किया जा सकता।