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जो व्यक्ति किसी वस्तु के कब्जे में दर्शित है, उसे स्वामी न मानने का भार, यह प्रतिज्ञात करने वाले व्यक्ति पर होता है कि वह स्वामी नहीं है।
जब दो पक्षकारों में से एक दूसरे के प्रति सक्रिय विश्वास की स्थिति में हो, तब उनके बीच संव्यवहार के सद्भाव को साबित करने का भार उस सक्रिय-विश्वास वाले पक्षकार पर होता है।
विक्षुब्ध क्षेत्र या दीर्घकालीन लोक-शांति भंग वाले क्षेत्र में, सशस्त्र बलों पर आक्रमण हेतु अग्न्यायुध/विस्फोटक प्रयोग के समय उपस्थित पाया गया व्यक्ति, अन्यथा साबित न होने तक, अपराधी उपधारित होगा।
विधिमान्य विवाह के दौरान, या विघटन के 280 दिन के भीतर माता के अविवाहित रहते जन्मा व्यक्ति उस पुरुष की धर्मज संतान माना जाएगा, जब तक अपहुंच साबित न हो।
विवाह के सात वर्ष के भीतर आत्महत्या करने वाली स्त्री के साथ पति या उसके नातेदार द्वारा क्रूरता किए जाने पर, न्यायालय आत्महत्या का दुष्प्रेरण उपधारित कर सकता है।
यदि मृत्यु से कुछ पूर्व किसी स्त्री के साथ दहेज-मांग हेतु क्रूरता या तंग किया जाना दर्शित हो, तो न्यायालय अभियुक्त द्वारा दहेज मृत्यु कारित करना उपधारित करेगा।
प्राकृतिक घटनाओं, मानवीय आचरण और कारबार के सामान्य अनुक्रम को ध्यान में रखते हुए न्यायालय संभाव्य तथ्यों (जैसे चोरी के माल का कब्जा, सहअपराधी की अविश्वसनीयता) का अस्तित्व उपधारित कर सकता है।
भा.न्या.सं. की धारा 64(2) के अधीन बलात्संग अभियोजन में मैथुन साबित होने पर, यदि पीड़िता न्यायालय में सम्मति न देना कथन करे, तो न्यायालय सम्मति का अभाव उपधारित करेगा।