logo

किसी निकाय/कुटुम्ब की प्रथाओं, धार्मिक प्रतिष्ठान के संविधान या विशिष्ट क्षेत्र में प्रयुक्त शब्दों के अर्थ पर ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों की राय सुसंगत है।
किसी व्यक्ति की दूसरे से नातेदारी पर, कुटुम्ब सदस्य आदि की आचरण-अभिव्यक्त राय सुसंगत है, परन्तु विवाह-विच्छेद व कुछ दाण्डिक कार्यवाहियों में विवाह साबित करने हेतु पर्याप्त नहीं।
जब कभी किसी जीवित व्यक्ति की राय सुसंगत हो, तब वे आधार भी सुसंगत हैं जिन पर वह राय आधारित है, जैसे विशेषज्ञ द्वारा किए गए प्रयोगों का विवरण।
सिविल मामलों में किसी व्यक्ति का शील, जो उस पर अध्यारोपित आचरण को संभाव्य/असंभाव्य बनाता हो, विसंगत है, सिवाय जहां वह अन्यथा सुसंगत तथ्यों से प्रकट हो।
दाण्डिक कार्यवाहियों में यह तथ्य कि अभियुक्त व्यक्ति अच्छे शील का है, सुसंगत तथ्य माना जाता है।
भा.न्या.सं. की धारा 64-78 के कतिपय यौन अपराधों के अभियोजन में सम्मति का प्रश्न होने पर, पीड़ित के शील या पूर्व लैंगिक अनुभव का साक्ष्य सुसंगत नहीं है।
दाण्डिक कार्यवाहियों में अभियुक्त का बुरा शील विसंगत है, जब तक कि उसके अच्छे शील का साक्ष्य न दिया गया हो; पूर्व दोषसिद्धि बुरे शील के साक्ष्य के रूप में सुसंगत है।
सिविल मामलों में, किसी व्यक्ति के शील का, जो उसे मिलने वाली नुकसानी की रकम को प्रभावित करता हो, सुसंगत तथ्य माना जाता है; "शील" में ख्याति व स्वभाव दोनों शामिल हैं।