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यदि प्रश्न हो कि कोई कार्य आकस्मिक था या साशय, तो यह तथ्य कि वह कार्य समरूप घटनाओं की श्रृंखला का भाग था जिनमें वही व्यक्ति संलिप्त था, सुसंगत है।
जब प्रश्न हो कि कोई विशिष्ट कार्य किया गया था या नहीं, तब कारबार के उस सामान्य अनुक्रम का अस्तित्व सुसंगत तथ्य है जिसके अनुसार वह कार्य स्वभावतः होता।
स्वीकृति एक मौखिक, दस्तावेजी या इलैक्ट्रॉनिक कथन है जो किसी विवाद्यक या सुसंगत तथ्य के बारे में अनुमान इंगित करता है और आगे वर्णित व्यक्तियों द्वारा किया गया हो।
कार्यवाही के पक्षकार या उसके प्राधिकृत अभिकर्ता के कथन स्वीकृतियां हैं, परन्तु प्रतिनिधिक हैसियत, हितबद्धता आदि की विशेष शर्तों के अधीन।
जिन व्यक्तियों की स्थिति या दायित्व वाद के किसी पक्षकार के विरुद्ध साबित करना आवश्यक हो, उनके कथन उस पक्षकार के विरुद्ध स्वीकृति और सुसंगत तथ्य हैं।
वाद के किसी पक्षकार ने किसी विवादग्रस्त विषय पर जानकारी हेतु जिस व्यक्ति को अभिव्यक्त रूप से निर्दिष्ट किया हो, उसके कथन स्वीकृति माने जाते हैं।
स्वीकृति उसे करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध सुसंगत और साबित की जा सकती है, परन्तु उसकी अपनी ओर से केवल कुछ अपवाद-स्थितियों में ही साबित की जा सकती है।
दस्तावेज की अन्तर्वस्तु के बारे में मौखिक स्वीकृतियां तब तक सुसंगत नहीं होतीं जब तक द्वितीयक साक्ष्य का हकदार होना दर्शित न हो या असली होना प्रश्नगत न हो।
सिविल मामलों में कोई स्वीकृति सुसंगत नहीं होती यदि वह इस शर्त पर की गई हो कि उसका साक्ष्य नहीं दिया जाएगा या पक्षकार परस्पर ऐसा सहमत हुए हों।
प्राधिकारवान व्यक्ति की ओर से उत्प्रेरणा, धमकी, प्रपीड़न या वचन से कारित संस्वीकृति दाण्डिक कार्यवाही में विसंगत है, जब तक उसका प्रभाव पूर्णतः दूर न हो।